सफल योगी क्यू?

दिनेश रावत ने जीवन मे हर छेत्र मे अपना रास्ता तराशा और कामयाबी हाशिल  की। उनके जीवन का लक्ष्य है की उनके अनुभव और ज्ञान के माध्यम से देश के युवाओ का उत्थान हो और भारत फिर से विश्व का सबसे उन्नत राष्ट्र बने। इस योगी का जन्म 1954 में कोलकाता में एक मध्यमवर्गीय व्यापारी  परिवार में हुआ, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से बी.कॉम. और एल.एल.बी. में अपनी शैक्षणिक डिग्री पूरी की। तेरह साल तक टेक्समाको, हिंदुस्तान डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन और इलेक्ट्रो स्टील कास्टिंग्स जैसी ब्लू-चिप कंपनियों में काम किया और 1986 में बिना किसी पूंजी के अपना छोटा सा बिजनेस शुरू किया। 

उन्नीस वर्षों में अति विषम परिष्थितियों को पार कर, निर्यात-आयात और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व्यवसाय में एक प्रमुख स्थान बना लिया। वह बीस से अधिक कंपनियों मे डायरेक्टर रहे और कई चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और बिजनेस बिरादरी समूहों के सदस्य भी थे।

व्यवसाय के दौरान, उन्हें साठ देशों की यात्रा करने का अवसर मिला। व्यावसायिक गतिविधि के साथ, उन्होंने अपनी यात्राओ का उपयोग  दुनिया के वास्तविक और अज्ञात इतिहास पर शोध करने मे और और दूसरा ताड़ के पेड़ों पर, लैंडस्क्रैपिइग और नर्सरी संबंधित जानकारी इकट्ठा करने में किया। 

उनका इंटरनेशनल ट्रेडिंग का व्यवसाय बहुत अच्छी तरह चल रहा था, परंतु  वो  इस तरह से जीवन बिताना चाहता थे जो मानवता के लिए एक वास्तविक योगदान हो। अतः उन्होने कारोबार को आहिस्ता आहिस्ता समेट कर देश और विश्व के लोगो की सेवा मे समर्पित हो गए|

दिनेश ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के बारे में काफी चिंतित थे। उन्होंने कोलकाता में ग्रीन मॉल की स्थापना करने का फैसला किया ताकि लोगों को प्रकृति के साथ सद्भाव रख कर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा सके। उन्होंने कोलकाता नगरी से अपना निवास त्याग कर समुकपोता नामक बंगाल के एक गाँव में रहना शुरू किया। लोगों को अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा बनाने के लिये उत्साहित किया और प्रक्टिकल में मदद की। उन्होंने भारत में पॉट प्लांट्स में कोको-पिट का उपयोग का एक्सपेरिमेंट करके पूरे देश में एक नई परम्परा शुरू की और आजये एक बड़ा उद्योग बन गया है। शहरी लैंडस्क्रैपिइग में बड़े पेड़ों और Palm  की शुरुआत की। उन्होंने “Palms for India” और “Green Your Surroundings” जैसी कामयाब पुस्तके लिखीं।

2012 मे प्रकृति बंधु संस्था बना कर कई पर्यावरण संरक्षण के कार्य किए जिसमे गाँव मे पेड़ लगाना और शहर के लोगो को को प्रकृति का सम्मान करते हुए जीवन जीने की कला सिखाई। 

अपनी विशेषज्ञता के साथ, उन्होंने भारतीय वानस्पतिक उद्यान (Indian Botanical Garden, Howrah), कोलकाता निगम (Kolkata Municipality), दक्षिणेश्वर काली मंदिर और विभिन्न सरकारी पर्यावरण विभागों की मदद की। उनके लेख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं। उन्होने 2008 मे प्रधान मंत्री को एक प्लान भेजा था जिसे लागू करने से भारत के 70% ग्रामीण लोगों को कुछ एक्सट्रा आमदनी होती, हमारा देश विश्व का एक महत्वपूर्ण वृक्ष निर्यातक बनता और हर कोने मे हरियाली होती और भारत की सराहना सारे विश्व मे होती। 

2013 मे एक प्लान बंगाल की सरकार को दिया था जिसके इम्प्लिमैनटेशन से बंगाल भारत का  होर्टीकल्चरल हब बन सकता था। (Sobuj Sansar)

दुनिया में पहली बार, उन्होंने पर्यावरण पर दो संगीत एल्बमों का निर्माण किया है- “प्रकृति की पुकार” और “प्रकृति वंदना”। उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है। उन्हें भारतीय नर्सरीमेन एसोसिएशन के अध्यक्ष( पूर्वी भारत) रूप में चुना गया है।”

उसे पौधों से प्यार है। प्रकृति और पर्यावरण सेवाएँ उनका जुनून हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्र के प्रति अपनी उच्च जिम्मेदारियों का एहसास है, अतः उन्होने निर्णय लिया की कारोबार त्याग कर अपने को पूर्णतय देश सेवा मे समर्पित कर दिया है। 

तीस वर्षों के अपने शोध के दौरान, उन्होंने देखा कि भारतीय अपने गौरवशाली अतीत से अनजान हैं, वे इस तथ्य से अनजान हैं कि भारत 4800 वर्षों तक दुनिया का सबसे धनी और समृद्ध राष्ट्र था। लेकिन दुर्भाग्यवश भारत को एक अशिक्षित, गरीबी से त्रस्त, पिछड़े देश के रूप में पेश किया गया है, जिसमें ज्यादातर निरक्षर आबादी है। राष्ट्र और उसके नागरिकों की गरिमा के साथ क्रूर मजाक देख कर उन्हें अत्यन्त पीड़ा होती है। “ग्लोरीज़ आफ इंडिया” वैबसाइट और विडियो के माध्यम से देश मे यह ज्ञान फैला रहे है।

महामारी COVID 19 के उद्भव के बाद, दुनिया अब पहले जैसी नहीं रहने वाली है, अब विश्व में भारत की अहम महत्वपूर्ण भूमिका होने वाली है। दुनिया को भारत के वास्तविक मूल्य को समझना चाहिए। और भारत के लोगों को भी सच्चा इतिहास जानना चाहिए जो सदियों से उनके दिमाग से छुपा दिया गया है।

महत्व और तात्कालिकता को देखते हुए, उन्होंने अपने सक्षम बच्चों को सभी ग्रीन माल संबंधित व्यावसायिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी सौंपी दी है और अपने को समर्पित कर दिया है राष्ट्र सेवा मे। अब उन्होंने एक ऐसी यात्रा शुरू की है, जो कि सिर्फ भारतीयों का ही नहीं, विश्व मे हर इंसान का आत्म-सम्मान बढ़ायेगा।

भारत को विश्व गुरु बनाने के लिये देशवाशिओ को हर प्रकार से उन्नत बनना होगा। इस कार्य को सम्पन्न करने हेतु उन्होने अपने 68 वर्षो के ज्ञान और अनुभव के आधार परएक कोर्से बनाया है “small-tips BIG RESULTS”। इसे हिन्दी विडियो के माध्यम से सबको फ्री उपलभ्ध करा  रहे है और अनेकों का जीवन उन्नत बन रहा है।

वे इंडियन नर्सरीमैन एसोसिएशन के प्रेसीडेंट है और प्रकृति बंधु ट्रस्ट के मैनिजिंग ट्रस्टी है और उनका मिशन है देश में एक ग्रीन एकोसिस्टम तैयार हो और हर  घर में हरियाली हो और लोग स्वस्थ जीवन जिये और पर्यावरण की रक्षा हो| इस लक्ष्य के लिए वे होम गार्ड्निंग के ऊपर बहुत ही उन्नत तरीके से अनलाइन कॉर्सेस करा रहे है जो की इस कोविड महामारी के समय अति प्रासंगिक है